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पंचम काण्ड — श्री रामचरितमानस

सुन्दरकाण्ड

श्री हनुमान जी की अमर गाथा — लंका दर्शन, सीता खोज और लंका दहन

जामवंत के बचन सुहाए।
सुनि हनुमंत हृदय हरषाए॥
तब लगि मोहि परिखेहु तुम भाई।
सहि दुख कंद मूल फल खाई॥

६०दोहे
२८०+चौपाइयाँ
१५छंद
सोरठे
सर्ग

📖सुन्दरकाण्ड — परिचय

श्री रामचरितमानस का पंचम काण्ड "सुंदरकाण्ड" सम्पूर्ण रामायण का हृदय है। यह एकमात्र ऐसा काण्ड है जिसका नायक भगवान राम नहीं, बल्कि उनके परम भक्त हनुमान जी हैं। इस काण्ड को "सुन्दर" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें हनुमान की सुंदर भक्ति, सुंदरी सीता की खोज और सुन्दर लंका का वर्णन है।

डॉ. धवलकुमार व्यास जी के प्रवचन विशेष रूप से इसी काण्ड पर केंद्रित हैं। सुन्दरकाण्ड का पाठ विश्वास, साहस और भक्ति का पाठ है — यही कारण है कि घर-घर में इस काण्ड का पाठ होता है।

मंगलाचरण
जामवंत कह सुनु हनुमाना।
का चुप साधि रहेहु बलवाना॥
पवन तनय बल पवन समाना।
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
जांबवान ने कहा — हे हनुमान! हे बलवान! क्यों चुप साधे बैठे हो? आप पवन के समान बलशाली, बुद्धि, विवेक और विज्ञान के भंडार हैं।

सुन्दरकाण्ड पाठ का महत्व

शास्त्रों के अनुसार सुन्दरकाण्ड का नियमित पाठ जीवन में अनेक लाभ देता है। डॉ. धवलकुमार व्यास जी के प्रवचन में इन फलों की विस्तृत व्याख्या की जाती है।

💪
संकट निवारण
जीवन की सभी बाधाओं और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
🧠
बुद्धि-विवेक
मानसिक शांति, एकाग्रता और निर्णय शक्ति में वृद्धि होती है।
🌟
सफलता
हर कार्य में सफलता और विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🏠
गृह शांति
घर में सुख-शांति, समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द बढ़ता है।
💊
रोग मुक्ति
शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।
🙏
भक्ति मार्ग
प्रभु राम और हनुमान जी की भक्ति का सच्चा मार्ग मिलता है।

📜सुन्दरकाण्ड — कथा प्रसंग

सुन्दरकाण्ड की कथा हनुमान जी के महाअभियान की गाथा है। इसमें उनका लंका जाना, माता सीता से मिलन, और वापसी का संपूर्ण वर्णन है।

🌊 महासागर लंघन
जांबवान के प्रोत्साहन से हनुमान जी अपनी शक्ति को पहचानते हैं और विशाल समुद्र को एक ही छलांग में पार कर जाते हैं। इस प्रसंग में उनका मैनाक पर्वत से मिलन और सिंहिका का वध होता है।
🏰 लंका में प्रवेश
हनुमान जी रात्रि में लंकिनी को परास्त करके लंका में प्रवेश करते हैं। वे छोटा रूप धारण करके पूरी लंका का भ्रमण करते हैं और माता सीता की खोज करते हैं।
🌳 अशोक वाटिका
हनुमान जी अशोक वाटिका में माता सीता से मिलते हैं। उन्हें श्री राम की अंगूठी देते हैं और माता जानकी से मुद्रिका प्राप्त करते हैं। यह प्रसंग अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक है।
🔥 लंका दहन
रावण के दरबार में पहुंचकर हनुमान जी श्री राम का संदेश देते हैं। रावण उनकी पूंछ में आग लगवाता है, किन्तु हनुमान जी उसी आग से पूरी लंका जला देते हैं।
🙏 सफल वापसी
सकुशल वापस लौटकर हनुमान जी श्री राम के चरणों में माता सीता का समाचार देते हैं। यह काण्ड विजय और भक्ति के संदेश के साथ समाप्त होता है।

📚सर्ग-वार प्रमुख चौपाइयाँ

सर्ग १ — जांबवान-हनुमान संवाद

जामवंत कह सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥
जांबवान बोले — हे हनुमान! हे बलवान! क्यों चुप बैठे हो?
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
आप पवन के समान बलशाली हैं, बुद्धि-विवेक और विज्ञान के भंडार हैं।
कवन सो काज कठिन जग माही। जो नहिं होइ तात तुम पाहीं॥
इस जगत में कौन सा कार्य इतना कठिन है जो आपसे नहीं हो सके?

सर्ग २ — समुद्र लंघन

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी॥
समुद्र ने हनुमान को रघुपति का दूत जानकर मैनाक पर्वत से उनकी थकान दूर करने को कहा।
निज बल उत्तर दिए उन्हें। जब हरि हित तन तजउँ ॥
हनुमान ने अपनी शक्ति का परिचय दिया — प्रभु के कार्य में विश्राम नहीं।

सर्ग ३ — लंका प्रवेश और सीता दर्शन

देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा। बैठेहिं बीति जात निसि जामा॥
हनुमान ने माता सीता को देखकर मन ही मन प्रणाम किया। रात्रि के प्रहर बीतते जा रहे थे।
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानघन।
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
मैं पवनकुमार को प्रणाम करता हूं, जिनके हृदय में धनुष-बाण सहित श्री राम निवास करते हैं।

सर्ग ४ — रावण दरबार और लंका दहन

जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे। तेहि पर बाँधेउ तनय तुम्हारे॥
जिन्होंने मुझ पर प्रहार किया, मैंने उन्हें मारा। फिर तुम्हारे पुत्र ने मुझे बांधा।
कपि के बचन सुनत बिहसा। जरउँ न सो किमि लंका बासा॥
वानर के वचन सुनकर रावण हंसा — इसे जलाकर लंका का निवास कैसे रहेगा?

सर्ग ५ — वापसी और राम-मिलन

अब कहु कुसल जाउँ बलिहारी। अनुज सहित सुखसागर खरारी॥
अब कुशल समाचार बताओ — छोटे भाई सहित खर के शत्रु (राम) सुख के सागर हैं।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
सभी संकट कटते हैं, सभी दर्द मिटते हैं — जो बलवीर हनुमान को स्मरण करता है।

🎤डॉ. धवलकुमार व्यास जी के प्रवचन

सुन्दरकाण्ड प्रवचन की विशेषताएं

📿
सरल भाषा में
कठिन संस्कृत श्लोकों को सरल हिंदी में समझाया जाता है
🌟
जीवन संदेश
रामायण के प्रसंगों से आज के जीवन के लिए मार्गदर्शन
🎵
भावपूर्ण गायन
चौपाइयों का मधुर गायन जो हृदय को छू जाता है
🙏
आध्यात्मिक ज्ञान
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का समन्वय

🙏 सुन्दरकाण्ड पाठ के लिए आमंत्रण

डॉ. धवलकुमार व्यास जी से सुन्दरकाण्ड पाठ और प्रवचन के लिए संपर्क करें। वे विशेष आयोजनों, घरेलू कार्यक्रमों और सामुदायिक समारोहों में सुन्दरकाण्ड का पाठ एवं प्रवचन करते हैं।

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📖विस्तृत सुन्दरकाण्ड पाठ

सुन्दरकाण्ड के संपूर्ण पाठ, दोहों, चौपाइयों, अर्थ और व्याख्या के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं —

🎙️ सुन्दरकाण्ड Episodes

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हनुमान भक्ति विधि, सिद्धि और उपाय
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