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श्री रामचरितमानस

दोहा शतक

सातों काण्डों के 30+ प्रमुख दोहे — हिंदी अर्थ एवं व्याख्या सहित

30+कुल दोहे
काण्ड
ग्रन्थ

📖 दोहा शतक — परिचय

श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने हजारों दोहों की रचना की है। प्रत्येक दोहा अपने आप में एक सम्पूर्ण जीवन-दर्शन लेकर आता है। इस दोहा शतक में सातों काण्डों से चुने गए सर्वाधिक प्रासंगिक और प्रसिद्ध दोहे संग्रहित हैं।

कलियुग केवल नाम अधारा। सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥

कलियुग में केवल राम नाम ही एकमात्र आधार है — स्मरण-स्मरण करके मनुष्य भव-सागर पार उतरते हैं।

डॉ. धवलकुमार व्यास जी के प्रवचनों में ये दोहे नियमित रूप से उद्धृत किए जाते हैं। प्रत्येक दोहे की गहन व्याख्या से भक्तों को जीवन-मार्गदर्शन मिलता है।

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बालकाण्ड
बालकाण्ड के प्रमुख दोहे
7 दोहे
1 बन्दउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नर रूप हरि। महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥
अर्थ: गुरु के चरण-कमल की वंदना करता हूं — जो कृपा के सागर और मनुष्य रूप में हरि हैं। जिनके वचन महामोह रूपी अंधकार के लिए सूर्य की किरणों के समान हैं।
2 जड़ चेतन गुण दोष मय बिस्व कीन्ह करतार। संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार॥
अर्थ: जड़-चेतन, गुण-दोष से युक्त यह विश्व विधाता ने बनाया। संत हंस की भाँति (इससे) दोष-जल छोड़कर गुण-रूपी दूध ग्रहण करते हैं।
3 मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी॥
अर्थ: मंगल के घर और अमंगल को हरने वाले — दशरथ के आँगन में विहार करने वाले (राम) द्रवित हों।
4 बिनु सत्संग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥ सत्संगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला॥
अर्थ: सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम की कृपा के बिना सत्संग सुलभ नहीं होता। सत्संगति आनंद और मंगल की जड़ है — वही सिद्धि का फल है, बाकी सब साधन फूल मात्र हैं।
5 राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार। तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजियार॥
अर्थ: हे तुलसी! यदि भीतर-बाहर उजाला चाहते हो तो जीभ रूपी दहलीज-द्वार पर राम-नाम रूपी मणि-दीप रखो।
6 ग्यान अखंड एक सीता पति। माया बस बिग्यान बहु भाँति॥ एहि कर हरषु बिषाद तुमहीं। जासु अंस इहाँ निज तन माहीं॥
अर्थ: ज्ञान अखंड — एक सीतापति ही हैं। माया के वश में विज्ञान अनेक प्रकार का है। इसका हर्ष-विषाद तुम्हीं जानो — जिसका अंश यहाँ अपने तन में है।
7 नाम जीह जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी॥ ब्यापक ब्रह्म अखंड अनंता। अखिल अमोघ अजित श्रीकंता॥
अर्थ: नाम जपकर जीभ से जोगी जागते हैं — जो विरक्त होकर ब्रह्मा की माया से अलग हो गए। व्यापक, अखंड, अनंत ब्रह्म — अखिल, अमोघ, अजित, श्रीकांत।

🌟 दोहे का महत्व

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संगीतात्मकता

दोहे की लय में गाने से मन स्वतः ही राम-भजन में लीन हो जाता है।

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जीवन-दर्शन

प्रत्येक दोहे में जीवन की गूढ़ समस्याओं का सरल समाधान है।

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सरल कंठस्थ

दोहा छोटा और लयबद्ध होने से जल्दी याद होता है।

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नित्य पाठ

प्रतिदिन कुछ दोहों का पाठ मन को भक्ति में स्थिर करता है।

🎤 प्रवचन में सुनें दोहों की व्याख्या

डॉ. धवलकुमार व्यास जी इन दोहों की विस्तृत व्याख्या अपने प्रवचनों में करते हैं।

📞 संपर्क करें 📿 सुन्दरकाण्ड 🙏 मानस स्तुति