🛡️ हनुमान कवच — परिचय
हनुमान कवच एक अत्यंत शक्तिशाली रक्षा स्तोत्र है जिसमें हनुमान जी से शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह कवच शत्रुओं से, भूत-बाधाओं से, दुर्घटनाओं से और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।
🛡️ विशेष लाभ: प्रतिदिन प्रातःकाल हनुमान कवच का पाठ करने से दिन भर किसी भी प्रकार का भय, शत्रु-बाधा या दुर्घटना नहीं होती। यह सर्वांग रक्षा का सर्वोत्तम उपाय है।
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ॐ श्री हनुमते नमः।
अस्य श्री हनुमत्कवचस्य ब्रह्मा ऋषिः।
गायत्री छन्दः। श्री हनुमान् देवता।
ह्रीं बीजम्। श्रीं शक्तिः। क्रों कीलकम्।
श्री हनुमत्प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥
इस श्री हनुमत्कवच के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता श्री हनुमान हैं। बीज ह्रीं, शक्ति श्रीं और कीलक क्रों है। श्री हनुमान जी की प्रसन्नता के लिए जप में विनियोग है।
📃 हनुमान कवच — सम्पूर्ण श्लोक
🛡️ शिर एवं मुख रक्षा
ॐ हनुमान् पातु शिरो मम, ललाटं रक्षतां हरिः। नेत्रे च वायुपुत्रश्च, कर्णौ रक्षतु केसरी॥
मेरे सिर की रक्षा हनुमान जी करें, ललाट की रक्षा हरि करें। नेत्रों की रक्षा वायुपुत्र करें और कानों की रक्षा केसरी नंदन करें।
🛡️ नासिका, मुख एवं कंठ रक्षा
नासिकां पातु वीरश्च, मुखं रक्षतु रामदूतः। जिह्वां रक्षतु रुद्रांशो, गलं पातु हनूमान्॥
नासिका की रक्षा वीर हनुमान करें, मुख की रक्षा रामदूत करें। जिह्वा की रक्षा रुद्रांश करें और गले की रक्षा हनुमान जी करें।
🛡️ भुजा एवं हस्त रक्षा
स्कन्धौ पातु महावीरो, भुजौ च मारुतात्मजः। करौ पातु कपीशश्च, नखान् पातु महाबलः॥
कंधों की रक्षा महावीर करें, भुजाओं की रक्षा मारुतात्मज करें। हाथों की रक्षा कपीश करें और नाखूनों की रक्षा महाबली हनुमान करें।
🛡️ हृदय, उदर एवं कटि रक्षा
हृदयं पातु वज्रांगो, उदरं पातु वानरः। नाभिं पातु महातेजा, कटिं पातु सुरार्चितः॥
हृदय की रक्षा वज्रांग करें, उदर की रक्षा वानर वीर करें। नाभि की रक्षा महातेजस्वी करें और कमर की रक्षा देवताओं द्वारा पूजित हनुमान करें।
🛡️ ऊरु एवं पाद रक्षा
ऊरू पातु महाशक्तिः, जानुनी पवनात्मजः। जंघे पातु नमस्कार्यो, गुल्फौ पातु प्रतापवान्॥
जांघों की रक्षा महाशक्ति करें, घुटनों की रक्षा पवनात्मज करें। पिंडलियों की रक्षा नमस्कार योग्य करें और टखनों की रक्षा प्रतापवान हनुमान करें।
🛡️ सर्वांग एवं दिशा रक्षा
पादौ पातु हनुमांश्च, सर्वांगं पातु वायुजः। पूर्वे पातु महाबाहु, आग्नेये पातु पिंगलः॥
पैरों की रक्षा हनुमान जी करें और सम्पूर्ण शरीर की रक्षा वायुपुत्र करें। पूर्व दिशा में महाबाहु रक्षा करें और आग्नेय दिशा में पिंगल हनुमान रक्षा करें।
🛡️ चारों दिशाओं की रक्षा
दक्षिणे पातु वज्रांगी, नैऋत्ये पातु केसरिः। पश्चिमे पातु वीरेशो, वायव्ये पातु मारुतिः॥
दक्षिण में वज्रांगी रक्षा करें, नैऋत्य में केसरी नंदन रक्षा करें। पश्चिम में वीरेश्वर रक्षा करें और वायव्य में मारुति रक्षा करें।
🛡️ ऊर्ध्व एवं अधो दिशा रक्षा
उत्तरे पातु रामेशो, ईशाने पातु भास्करः। ऊर्ध्वे पातु महावीरो, अधश्च पातु वानरः॥
उत्तर में रामेश्वर रक्षा करें, ईशान में भास्कर रक्षा करें। ऊपर महावीर रक्षा करें और नीचे वानर वीर रक्षा करें।
🛡️ दिन-रात एवं संध्या रक्षा
रात्रौ पातु निशाचारी, दिवा पातु दिवाकरः। संध्यायां पातु सन्धाता, सर्वदा पातु राघवः॥
रात्रि में निशाचारी हनुमान रक्षा करें, दिन में दिवाकर रक्षा करें। संध्या काल में संधाता रक्षा करें और सदा सर्वदा रघुकुल नायक रक्षा करें।
🛡️ स्थान एवं परिस्थिति रक्षा
वने पातु वनचारी, ग्रामे पातु ग्रामवासिनाम्। युद्धे पातु महाशूरो, मार्गे पातु महाबलः॥
वन में वनचारी हनुमान रक्षा करें, ग्राम में ग्रामवासियों के रक्षक रक्षा करें। युद्ध में महाशूर रक्षा करें और मार्ग में महाबली रक्षा करें।
🛡️ फलश्रुति
इदं कवचमज्ञात्वा, यो हनुमत्पदं भजेत्। शतावृत्त्या जपेन्नित्यं, सर्वदोषैः प्रमुच्यते॥
इस कवच को जाने बिना जो हनुमान के पद का भजन करता है, वह नित्य सौ बार जप करने से सभी दोषों से मुक्त हो जाता है।